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Nai Sahastrabdi Ke Lie Gyan Hindi Edition Kindle Edition

By Sri Sri Ravi Shankar Hindi

संपूर्ण विश्व की संरचना में मूल तत्व प्रेम ही है और यही प्रेम हर एक के मूल में मौजूद है। सभी में ईश्वर मौजूद है और सभी में प्रेम का तत्व भी है। ईश्वर-प्रेम का ही प्रतिरूप है। प्रश्न यह उठता है कि यदि ऐसा है तो जीवन का उद्देश्य क्या है? यदि हर एक मेें ईश्वर व प्रेम मौजूद है तो फिर जीवन में मार्ग तलासने की क्या जरूरत है? इसका उत्तर यह है कि जीवन का मार्ग पूर्णता की ओर जाता है। सभी को पूर्णता की चाह होती है लेकिन यदि हर एक मे ईश्वर है तो फिर हर एक पूर्ण ही तो है। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है क्योंकि प्रेम की छ: अशुद्धियां - क्रोध, वासना, लोभ, ईर्श्या, अहंकार व भ्रम। हम अशुद्धि से शुद्ध प्रेम की अवस्था प्राप्त कर सकते हैं। साधना का यही उद्देश्य है - निर्मलता को पाने का प्रयास करना, अर्थात मूल स्त्रोत की ओर अपने आप को ले जाना।” “कई ज्ञानी पुरुष अभ्यास को महत्व नहीं देते हैं लेकिन यह सही नहीं है। सिर्फ सत्य के बारे में मौखिक शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं है। जो ज्ञान पाने का इच्छुक है, उसका स्तर पहचान कर उसे ज्ञान के मार्ग पर आगे बढ़ाना, आवश्यक है। सिर्फ लक्ष्य का वर्णन करना काफी नहीं है। लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग और दिशा का ज्ञान उपलब्ध कराना भी ज़रूरी है

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